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Hindi Bhajan Lyrics By Your Astrology Guru- Create an expansive and respectful image that embodies the diverse essence of Ganesh, Vishnu, Guru Nanak, Durga Maa, Hanumanji, Sri Ram, Kali M

दे दे थोड़ा प्यार मैया तेरा क्या घट जायेगा भजन लिरिक्स

दे दे थोड़ा प्यार मैया,तेरा क्या घट जायेगा,ये बालक भी तर जायेगा,दे दे थोड़ा प्यार ।। दे दिया तुमने,सबको सहारा माँ,जो द्वारे आया है..भर दिया दामन,उसका ख़ुशी से माँ,जो अर्जी लाया है..मुझको देने से,मुझको देने से खजाना,कम नही हो जायेगा,ये बालक भी तर जायेगादे दे थोड़ा प्यार… है पुराना माँ,रिश्ता हमारा जो,उसे तुम याद करो..करदे […]

जाने माला के प्रकार, माला जपने का सही तरीका, नियम और फायदे-By Your Astrology Guru

योग : आत्मा का परमात्मा से मिलन

योग क्या है | What is Yoga योग का शाब्दिक अर्थ है – जोड़, सम्बन्ध या मिलन| प्रत्येक व्यक्ति का किसी न किसी व्यक्ति, वस्तु, वौभव से योग होता ही है| पिता-पुत्र, पति-पत्नी का आपस में लौकिक सम्बन्ध भी एक योग ही होता है| जिस प्रकार अलग होने को  “वियोग” शब्द दिया जाता है इसी

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हाथ की भाग्य रेखा का रहस्य – Bhagya Rekha in Hand

भाग्य रेखा – Bhagya Rekha हाथ की भाग्य रेखा दर्शाती है की व्यक्ति का भाग्य प्रबल है या दुर्बल, हस्त रेखा ज्ञान के अनुसार भाग्य रेखा (Fate line in Palmistry) कलाई से आरंभ होती हुई चंद्र पर्वत से होते हुये जीवन रेखा या मस्तिष्क रेखा और या स्वास्थ्य रेखा तक जाती है। भाग्य रेखा, शिक्षा

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तैत्तिरीय उपनिषद

कृष्ण यजुर्वेद शाखा का यह उपनिषद तैत्तिरीय आरण्यक का एक भाग है। इस आरण्यक के सातवें, आठवें और नौवें अध्यायों को ही उपनिषद की मान्यता प्राप्त हैं इस उपनिषद के रचयिता तैत्तिरि ऋषि थे। इसमें तीन वल्लियां- ‘शिक्षावल्ली,’ ‘ब्रह्मानन्दवल्ली’ और ‘भृगुवल्ली’ हैं। इन तीन वल्लियों को क्रमश: बारह, नौ तथ दस अनुवाकों में विभाजित किया

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छान्दोग्य उपनिषद – ॐ कार को सर्वोत्तम रस मानने वाला

छान्दोग्य उपनिषद – Chandogya Upanishads Chandogya Upanishad Hindi : सामवेद की तलवकार शाखा में इस उपनिषद को मान्यता प्राप्त है। छान्दोग्य उपनिषद (Chandogya Upanishad Pdf) मे दस अध्याय हैं। इसके अन्तिम आठ अध्याय ही इस उपनिषद में लिये गये हैं। नाम के अनुसार इस उपनिषद का आधार ‘छन्द’ है, इसका यहाँ व्यापक अर्थ के रूप

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केनोपनिषद – ब्रह्म की उपसना करने का ढंग बतलाता

Kenopanishad – केनोपनिषद  Kenopanishad Hindi – सामवेदीय ‘तलवकार ब्राह्मण’ के नौवें अध्याय में केनोपनिषद (Kena upanishad PDF) का उल्लेख है। इसमें ‘केन’ (किसके द्वारा) का विवेचन होने से इसे ‘केनोपनिषद’ (Kenopanishad Hindi) कहा गया है। इसके चार खण्ड हैं। प्रथम और द्वितीय खण्ड में गुरु-शिष्य की संवाद-परम्परा द्वारा उस (केन) प्रेरक सत्ता की विशेषताओं, उसकी

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कठोपनिषद – Kathopanishad 

Kathopanishad – कठोपनिषद kathopanishad in hindi – कृष्ण यजुर्वेद शाखा का यह उपनिषद (kathopanishad pdf) अत्यन्त महत्त्वपूर्ण उपनिषदों में है। कठोपनिषद के रचयिता कठ नाम के तपस्वी आचार्य थे। वे मुनि वैशम्पायन के शिष्य तथा यजुर्वेद की कठशाखा के प्रवृर्त्तक थे। इसमें दो अध्याय हैं और प्रत्येक अध्याय में तीन-तीन वल्लियां हैं, जिनमें वाजश्रवा-पुत्र नचिकेता

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देवी लक्ष्मी | विष्णुप्रिया

देवी लक्ष्मी | विष्णुप्रिया लक्ष्मी हिन्दू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं। वो lord Vishnu की पत्नी हैं और धन, सम्पदा, शान्ति और समृद्धि की देवी मानी जाती हैं। दिवाली उत्सव में उनकी lord ganesha सहित पूजा की जाती है। gaytri mantra जपने से  गायत्री की कृपा से मिलने वाले वरदानों में एक lakshmi भी है। जिस पर यह

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उपनिषदों का रहस्य – वेदों का अंतिम भाग और वैदिक दर्शन का सार

उपनिषद | Upnishads Hindi उपनिषद् (Upnishad in Hindi) हिन्दू धर्म के महत्त्वपूर्ण श्रुति धर्मग्रन्थ हैं। उपनिषद् (Upnishads) वैदिक वांग्मय के अभिन्न भाग हैं। इनमें परमेश्वर, परमात्मा-ब्रह्म और आत्मा के स्वभाव और सम्बन्ध का बहुत ही दार्शनिक और ज्ञानपूर्वक वर्णन दिया गया है। उपनिषद ही समस्त भारतीय दर्शनों के मूल स्त्रोत हैं, चाहे वो वेदान्त हो या

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ब्रह्मा | प्रजापति

ब्रह्मा | प्रजापति Lord Brahma हिन्दू धर्म में एक प्रमुख देवता हैं। ये हिन्दुओं के तीन प्रमुख देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) में से एक हैं। ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता कहा जाता है। सृष्टि रचियता से मतलब सिर्फ ‍जीवों की सृष्टि से है। ब्रह्मा को विश्व के आद्य सृष्टा, प्रजापति, पितामह तथा हिरण्यगर्भकहते हैं। पुराणों में जो

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सरस्वती देवी : सृजन की देवी, विद्या की अधिष्ठात्री, श्वेत वस्त्रधारिणी और कला की जननी

सरस्वती देवी : सृजन की देवी, विद्या की अधिष्ठात्री, श्वेत वस्त्रधारिणी और कला की जननी सरस्वती hindu dharm  की प्रमुख देवियों में से एक हैं। ये Lord Brahma की मानसपुत्री हैं जो विद्या की अधिष्ठात्री देवी मानी गई हैं। इनका नामांतर ‘शतरूपा’ भी है। इसके अन्य पर्याय हैं, वाणी, वाग्देवी, भारती, शारदा, वागेश्वरी इत्यादि। ये शुक्लवर्ण, श्वेत वस्त्रधारिणी, वीणावादनतत्परा

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सिद्धिविनायक मंदिर – Siddhivinayak Mandir

सिद्घिविनायक मंदिर – Siddhivinayak Mandir अष्ट विनायक में दूसरे गणेश हैं सिद्धिविनायक। यह मंदिर पुणे से करीब 200 किमी दूरी पर स्थित है। समीप ही भीम नदी है। यह क्षेत्र सिद्धटेक गावं के अंतर्गत आता है। यह पुणे के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। मंदिर करीब 200 साल पुराना है। सिद्धटेक में सिद्धिविनायक

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नाग पंचमी कथा

नाग पंचमी कथा – Nag Panchami Katha नाग पंचमी (Nag Panchami) एक ऐसा पर्व है जिसमें नागों और सर्पों की पूजा की जाती है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि में यह पर्व पूरे देश में पूर्ण श्रद्धा से मनाया जाता है। आइये जानते है इसकी पौराणिक कथाओ के बारे में नाग पंचमी

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परशुराम | शिव भक्त परशुराम

  परशुराम | शिव भक्त परशुराम आरम्भिक शिक्षा महर्षि विश्वामित्र एवं ऋचीक के आश्रम में प्राप्त होने के साथ ही महर्षि ऋचीक से सारंग नामक दिव्य वैष्णव धनुष और ब्रह्मर्षि कश्यप से विधिवत अविनाशी वैष्णव मन्त्र प्राप्त हुआ। तदनन्तर कैलाश गिरिश्रृंग पर स्थित भगवान शंकर के आश्रम में विद्या प्राप्त कर विशिष्ट दिव्यास्त्र विद्युदभि नामक

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सूर्य देवता

सूर्य देवता भुवन भास्कर भगवान सूर्यनारायण प्रत्यक्ष देवता हैं, प्रकाश रूप हैं। उपनिषदों में भगवान सूर्य के ‍तीन रूप माने गए हैं- (1) निर्गुण, निराकार, (2) सगुण निराकार तथा (3) सगुण साकार। यद्यपि सूर्य निर्गुण निराकार हैं तथा अपनी माया शक्ति के संबंध में सगुण आकार भी हैं। सूर्य आत्मा जगत्स्तथुषश्च – ऋग्वेद ज्योतिषां रविरंशुमान