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जाने माला के प्रकार, माला जपने का सही तरीका, नियम और फायदे-By Your Astrology Guru

जगन्नाथ पूरी मंदिर – Jagannath Puri Temple

जगन्नाथ मंदिर – Jagannath Temple पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर एक महत्वपूर्ण हिंदू मंदिर है जो भारत के पूर्वी तट पर स्थित, भगवान जगन्नाथ का एक रूप है, जो ओडिशा राज्य के पुरी में स्थित है। पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर को हिन्दुओं के चार धाम में से एक गिना जाता है। पुराणों में इसे

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जानिये आपकी कुंडली में नौकरी के योग

जानिये आपकी कुंडली में नौकरी के योग ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों और उनके योगो के आधार पर ही आपके कार्यो के फलो का ज्ञान मिलता है. इनमे से कुछ ग्रह ऐसे होते है जो अशुभ ग्रह बनाते है और आपका सुख चैन चुरा लेते है लेकिन कुछ ग्रह ऐसे भी होते है जो आपके जीवन

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लाल किताब के इन उपायो से शत प्रतिशत भूत व प्रेतबाधा से मुक्ति मिलेगी

लाल किताब के इन उपायो से शत प्रतिशत भूत व प्रेतबाधा से मुक्ति मिलेगी  में भूतों से बचने के अनेक उपाय बताए गए हैं। चरक संहिता में प्रेत बाधा से पीड़ित रोगी के लक्षण और निदान के उपाय विस्तार से मिलते हैं।ज्योतिष साहित्य के मूल ग्रंथों- प्रश्नमार्ग, वृहत्पराषर, होरा सार, फलदीपिका, मानसागरी आदि में ज्योतिषीय

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नल दमयंती की कथा – Nal Damyanti Katha

  नल दमयंती की कथा – Nal Damyanti Story आज आपको राजा Nal Damyanti  की कथा (Nal Damyanti Katha) बताएँगे, एक बार की बात है निषध देश में वीरसेन के पुत्र नल नाम के एक राजा थे। बहुत सुन्दर और गुणवान थे। वे सभी तरह की अस्त्र विद्या में भी बहुत निपुण थे। उन्हें जूआ

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लाल किताब के ज्योतिष उपाय से करे शनि देव को प्रसन्न

लाल किताब और शनि धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिवार (शनिवार व्रत कथा) को कुछ विशेष उपाय करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों का कल्याण करते हैं। मान्यता के अनुसार, मनुष्य को उसके अच्छे-बुरे कामों का फल शनिदेव ही देते हैं, इसलिए अच्छे काम करने के साथ ही शनिदेव को प्रसन्न रखना भी आवश्यक

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लाल किताब अनुसार सपनो का मतलब और स्वप्न फल

लाल किताब अनुसार स्वप्न फल – Sapno Ka Matlab in Hindi स्वप्न फल लाल किताब – ज्योतिष के अनुसार हर सपने का एक ख़ास संकेत और फल होता है।  251 स्वपन फल लाल किताब ज्योतिष के अनुसार आज आपको Sapno Ka Matlab बताये जा रहे है, तो चलिए शुरू करते है – 1 – आंखों

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साल में 5 घंटे खुलने वाला अद्भुत निराई माता का मंदिर

निराई माता – Nirai Mata Temple  देवी-देवता के मंदिर भारत के कोने-कोने पर स्थित है। हर मंदिर का अपना कोई न कोई रहस्य होता है। जिसके कारण वह विश्व प्रसिद्ध होते है। कोई अपने कामों के कारण भी हो सकता है। आज हम आपको ऐसे मंदिर के बारें में बता रहे है जो अपने आप

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मोक्ष संन्यास योग – Moksha Sanyas Yoga – गीता अध्याय -18

गीता अध्याय मोक्ष संन्यास योग – Moksha Sanyas Yoga त्याग का विषय: अर्जुन उवाच सन्न्यासस्य महाबाहो तत्त्वमिच्छामि वेदितुम्‌ । त्यागस्य च हृषीकेश पृथक्केशिनिषूदन ॥  भावार्थ : अर्जुन बोले- हे महाबाहो! हे अन्तर्यामिन्‌! हे वासुदेव! मैं संन्यास और त्याग के तत्व को पृथक्‌-पृथक्‌ जानना चाहता हूँ॥1॥ श्रीभगवानुवाच काम्यानां कर्मणा न्यासं सन्न्यासं कवयो विदुः । सर्वकर्मफलत्यागं प्राहुस्त्यागं

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श्रद्धात्रय विभाग योग – Shradhatray Vibhag Yoga- गीता अध्याय -17

गीता अध्याय -17 श्रद्धात्रय विभाग योग – Shradhatray Vibhag Yoga श्रद्धा का और शास्त्रविपरीत घोर तप करने वालों का विषय : अर्जुन उवाच ये शास्त्रविधिमुत्सृज्य यजन्ते श्रद्धयान्विताः। तेषां निष्ठा तु का कृष्ण सत्त्वमाहो रजस्तमः॥  भावार्थ : अर्जुन बोले- हे कृष्ण! जो मनुष्य शास्त्र विधि को त्यागकर श्रद्धा से युक्त हुए देवादिका पूजन करते हैं, उनकी स्थिति

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दैवासुर सम्पद विभाग योग – Daivasur Sampad Vibhag Yoga – गीता अध्याय -16

गीता अध्याय -16 दैवासुर सम्पद विभाग योग – Daivasur Sampad Vibhag Yoga फलसहित दैवी और आसुरी संपदा का कथन: श्रीभगवानुवाच अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः। दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम्‌॥  भावार्थ : श्री भगवान बोले- भय का सर्वथा अभाव, अन्तःकरण की पूर्ण निर्मलता, तत्त्वज्ञान के लिए ध्यान योग में निरन्तर दृढ़ स्थिति (परमात्मा के स्वरूप को तत्त्व से जानने

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पुरुषोत्तमयोग – Purushottma Yoga – गीता अध्याय -15

गीता अध्याय -15 पुरुषोत्तमयोग – Purushottma Yoga संसार वृक्ष का कथन और भगवत्प्राप्ति का उपाय : श्रीभगवानुवाच ऊर्ध्वमूलमधः शाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्‌ । छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्‌ ॥  भावार्थ : श्री भगवान बोले- आदिपुरुष परमेश्वर रूप मूल वाले (आदिपुरुष नारायण वासुदेव भगवान ही नित्य और अनन्त तथा सबके आधार होने के कारण और सबसे ऊपर

गुणत्रय विभाग योग – Gunatray Vibhag Yoga – गीता अध्याय -14

गुणत्रय विभाग योग – Gunatray Vibhag Yoga – गीता अध्याय -14

गीता अध्याय -14 गुणत्रय विभाग योग – Gunatray Vibhag Yoga ज्ञान की महिमा और प्रकृति–पुरुष से जगत्‌ की उत्पत्ति: श्रीभगवानुवाच परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानं मानमुत्तमम्‌ । यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे परां सिद्धिमितो गताः ॥  भावार्थ : श्री भगवान बोले- ज्ञानों में भी अतिउत्तम उस परम ज्ञान को मैं फिर कहूँगा, जिसको जानकर सब मुनिजन इस संसार से

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क्षेत्र क्षेत्रजना विभाग योग – Kshetra Kshetrajan Vibhag Yoga – अध्याय -13

गीता अध्याय -13 क्षेत्र क्षेत्रजना विभाग योग – Kshetra Kshetrajan Vibhag Yoga ज्ञानसहित क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ का विषय –  श्रीभगवानुवाच इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते। एतद्यो वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ इति तद्विदः॥  भावार्थ : श्री भगवान बोले- हे अर्जुन! यह शरीर ‘क्षेत्र’ (जैसे खेत में बोए हुए बीजों का उनके अनुरूप फल समय पर प्रकट होता है, वैसे ही