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जाने माला के प्रकार, माला जपने का सही तरीका, नियम और फायदे-By Your Astrology Guru

अंक ज्योतिष 2020 – जाने कौन से मूलांक वालो की होगी जीवन के कोनसे वर्ष में बल्ले बल्ले

अंक ज्योतिष – Numerology 2020 Numerology By Date of Birth –  न्यूमरोलॉजी यानी अंक ज्योतिष से भी भविष्य के बारे में काफी कुछ जाना जा सकता है। अंक ज्योतिष के माध्यम से आप कई समस्याओं के समाधान जान सकते हैं, साथ ही ये भी जान सकते हैं कि आपकी भाग्योदय किस साल में होगा। ये

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धार्मिक क्रियाओ में पिले वस्त्र, खास धातु के पात्र और आसन क्यों आवश्यक और लाभदायक होता है ? जानिए

धार्मिक क्रियाओं में पीत-वस्त्र धारण क्यों ? आजकल कार्यानुसार वस्त्र धारण की धारण विविध क्षेत्रों में प्रचलित हो गई हैं। इसमें वातावरण निर्माण के लिए विशिष्ट पोशाक की आवश्यकता होती है। देव कार्य-पूजा, होम तथा नित्य कर्म और देव पितृकार्य-श्रद्वा आदि धार्मिक प्रसंगों के समय रोेजाना के वस्त्र शरीर पर रखना उचित नहीं है। इसके

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शास्त्रानुसार आरोग्य के लिए कुश का आसन, भस्म का लेपन और पंचगव्य की महत्ता

कुश के आसन की महत्ता क्यों ? पुराणों के अनुसार जब भगवान विष्णु वाराह रूप धारण कर समुद्र में छिपे असुर हिरण्याक्ष का वध कर बाहर निकले तो उन्होनें अपने बालों को झटका। उस समय उनके कुछ रोम पृथ्वी पर गिर । वही कुश के रूप में प्रकट हुए। कुश कुचालक है, इसलिए इसके आसन

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एकादशी व्रत क्यों किया जाता है ? जाने देवशयनी और देवोत्थान एकादशी के बारे में

एकादशी व्रत क्यों किया जाता है ? एकादशी तिथि को मनःशक्ति का केन्द्र चन्द्रमा क्षितिज की ग्यारहवीं कक्षा पर स्थित होता है। यदि इस अनुकूल समय में मनोनिग्रह की साधना की जाए तो वह शीघ्र फलवती सिद्ध हो सकती है। इस वैज्ञानिक आशय से ही एकादशेन्द्रियभूत मन को एकादशी तिथि के दिन धर्मानुष्ठान एवं व्रतोपवास

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अकालमृत्यु और असाध्य रोगों से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र जप

महामृत्युंजय मंत्र जाप क्यों ? धर्मग्रंन्थों में भगवान शिव कों प्रसन्न करने, अकालमृत्यु से बचने तथा असाध्य रोगों से मुक्त होने के लिए भगवान शिव केे महामृत्युंजय मंत्र के जप का उल्लेख किया गया हैं। इस जप के प्रभाव से व्यक्ति मौत के मुंह में जाने से भी बच जाता हैं। यदि मारक ग्रह दशाओं

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भगवन शिव की आराधना हेतु महेश नवमी उत्सव क्यों मनाया जाता है

महेश नवमी उत्सव क्यों ? हिंदू समाज का महेश्वरी वर्ग महेश (शिव) नवमी उत्सव धूमधाम से मनाता है। कहा जाता है कि इस वंश की उत्पत्ति शिव यानी महेश द्वारा हुई थी। इस उत्सव पर रूद्राभिषेक करके भगवान शिव की या़त्रा निकालीस जाती हैं किसी समय खड्गलसेन नाम का राजा एक राज्य में सिंहासनारूढ़ था।

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सुखी और सकारात्मक जीवन के लिये अपनाएं ये वास्तु टिप्स

वास्तु उपाय – Vastu Remedies  हर चीज़ को करने का एक सलीका होता है। जब चीज़ें करीने सजा कर एकदम व्यवस्थित रखी हों तो कितनी अच्छी लगती हैं। उससे हमारे भीतर एक सकारात्मक उर्जा का संचार होता है। वास्तु हमें यही सिखाता है। ज्योतिष शास्त्र में माना जाता है कि घर के निर्माण की रूप

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ओंकार सर्वश्रेष्ठ क्यों ?

ओंकार सर्वश्रेष्ठ क्यों ? ‘ योग दर्शन ’ में कहा गया है ऊॅं साक्षात् ब्रह्म एतद्वि एवं अक्षर परम्। एतद्धयेवाक्षरं ज्ञात्वा यो यदिच्छति तस्य तत्।। ‘ओेंकार ’ की संकल्पना के विषय में भारत की सभी भाषाओं में प्रचुर साहित्य उपलब्ध है। उपनिषद् एवं योग ग्रंथों में ओंकार विषयक उद्बोधक उपपत्ति बताई गई है। ‘श्रीमद्भगवद् गीता ’

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मंत्र जप में माला का प्रयोग क्यों किया जाता है ?

मंत्र जप में माला का प्रयोग जप करते समय दाएं हाथ की मध्यता उंगली के बीच पोर पर माला रखकर अंगूठे से माला के एक-एक मनके अपनी ओर खींचनी होती है। खीचते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि माला के मनके एक-दूसरे से न टकराएं। इसलिए माला के मनके गुथे हुए होने चाहिए। जप करते

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पुराणों के अनुसार मानव जीवन में संकल्प का महत्व क्यों और कैसे ?

संकल्प का महत्व क्यों और कैसे ? बहुत-सी इच्छाओं में से किसी एक इच्छा का चुनाव कर उसे मुर्त रूप देने का नाम ही संकल्प है। अतःसंकल्पपूर्वक किए गए कार्य का फल अवश्य मिलता हैं। ‘मनु स्मृति’ में कहा गया है- संकल्पमूलः कामौ वै यज्ञाः संकल्प सम्भवाः व्रता नियम कर्माश्च सर्वे संकल्पजाः स्मृताः।। यह भी

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गृह प्रवेश और भूमि पूजन, शुभ मुहूर्त और विधिपूर्वक करने पर रहेंगे दोष मुक्त और लाभदायक

गृह प्रवेश और भूमि पूजन – Grah Pravesh & Bhumi Pujan भवन सम्बन्धी कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ माह का चयन करना अति महत्वपूर्ण होता है । भारतीय कैलेण्डर  के अनुसार फाल्गुन, वैसाख एवं सावन के महीने भूमिपूजन, शिलान्यास एवं गृह निर्माण ( Grah Nirman ) हेतु  के लिए सर्वश्रेष्ठ महीने माने गए हैं।

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हिन्दू धर्मानुसार उपवास ( व्रत ) क्यों किया जाता है, जानिए वैज्ञानिक कारण

उपवास ( व्रत ) क्यों ? | Fasting in Hinduism  उपवास का व्यावहारिक अर्थ है अन्न ग्रहण न करना य उपवास के पदार्थ खाना। उपवास में आलस्य, निद्रा एवं पित्त विकार आदि का उद्भव न हो; इसलिए कम अन्न भक्षण करना आवश्यकत रहता है। उपवास अच्छी तरह हो, इसके लिए दिनभर कुछ न खाकर केवल

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धार्मिक कार्यों में अलग अलग दिशाओ का वैज्ञानिक महत्व और आरोग्य लाभ

धार्मिक कार्यों में अलग दिशाएं ? शास्त्रों अनुसार दस दिशाएं मानी गई है- चार मुख्य, चार उपदिशा एवं ऊध्र्व-अधवरा। सूर्योंदय को पूर्व दिशा और सूर्यास्त को पश्चिम दिशा मानकर आठ अन्य दिशाएं निश्चित की गई हैं। प्रातः संध्या में देव कार्य, यज्ञ कार्य, आचमन और प्राणयाम के लिए पूर्व दिशा की तरफ मुख किया जाता

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ब्रह्म मुहूर्त क्या है ? और क्यों इसमें निद्रा को निषेध बतलाया गया है

सूर्योदय से पूर्व दिन में दो प्रहार होते है, ब्रहम मुहूर्त उन्ही दो प्रहर में से पहले प्रहर को कहा जाता है. उसके बाद वाले समय को विष्णु मुहूर्त कहते है. अगर समय की बात की जाये तो जिस वक़्त सुबह होती है लेकिन सूर्य अभी दिखाई नही दे रहा होता है, उस वक़्त हमारी

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क्यों ईशान मुखी भवन की तुलना कुबेर देव की नगरी अलकापुरी से की जाती है

ईशान मुखी भवन (Ishan Mukhi Bhawan) : जिस भवन के सामने – मुख्य द्वार के सामने ईशान दिशा ( उत्तर पूर्व दिशा ) की ओर मार्ग होता है ऐसे भवन को ईशान मुखी भवन कहा जाता है। इस तरह के भवन के शुभ अशुभ के परिणाम का प्रभाव सीधे गृह स्वामी एवं उसकी संतान पर