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जाने माला के प्रकार, माला जपने का सही तरीका, नियम और फायदे-By Your Astrology Guru

शत्रुनाशिनी श्री बगलामुखी – शत्रु बाधा हेतु बगलामुखी मंत्र और यन्त्र साधना और सिद्धि विधि

शत्रु बाधा हेतु बगलामुखी मंत्र साधना – Baglamukhi Sadhna  शत्रुनाशिनी श्री बगलामुखी (Baglamukhi) का परिचय भौतिकरूप में शत्रुओं का शमन करने की इच्छा रखने वाली तथा आध्यात्मिक रूप में परमात्मा की संहार शक्ति हैं। पीताम्बरा विद्या के नाम से विख्यात बगलामुखी की साधना (Baglamukhi Sadhna) प्रायः शत्रु भय से मुक्ति और वाक् सिद्धि के लिए

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आदि शक्ति योनिस्तोत्रम्

आदि शक्ति योनिस्तोत्रम् ॐ भग-रूपा जगन्माता सृष्टि-स्थिति-लयान्विता । दशविद्या – स्वरूपात्मा योनिर्मां पातु सर्वदा ।।१।। कोण-त्रय-युता देवि स्तुति-निन्दा-विवर्जिता । जगदानन्द-सम्भूता योनिर्मां पातु सर्वदा ।।२।। कात्र्रिकी – कुन्तलं रूपं योन्युपरि सुशोभितम् । भुक्ति-मुक्ति-प्रदा योनि: योनिर्मां पातु सर्वदा ।।३।। वीर्यरूपा शैलपुत्री मध्यस्थाने विराजिता । ब्रह्म-विष्णु-शिव श्रेष्ठा योनिर्मां पातु सर्वदा ।।४।। यह भी पढ़े : श्री पार्वती जी

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शिव पुराण कथा – शिव के महात्मय से ओत-प्रोत महाशिवपुराण

शिव पुराण – Shiv Puran Katha in Hindi  Shiv Puran Katha – शिव का अर्थ है कल्याण। शिव के महात्मय से ओत-प्रोत से यह पुराण शिव पुराण कथा (Shiv Puran khatha) के नाम से प्रसिद्ध है। 18 पुराणों में कहीं शिव पुराण (Shiv Puran in Hindi) तो कहीं वायु पुराण का वर्णन आता है। शिव

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ऋणमोचक मंगल स्तोत्र

ऋणमोचक मंगल स्तोत्र मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः । स्थिरासनो महाकयः सर्वकर्मविरोधकः ॥1।। लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः । धरात्मजः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः॥2।। अङ्गारको यमश्चैव सर्वरोगापहारकः । व्रुष्टेः कर्ताऽपहर्ता च सर्वकामफलप्रदः॥3।। एतानि कुजनामनि नित्यं यः श्रद्धया पठेत् । ऋणं न जायते तस्य धनं शीघ्रमवाप्नुयात् ॥4।। धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम् । कुमारं शक्तिहस्तं च मङ्गलं प्रणमाम्यहम् ॥5।।  यह भी

Hindi Bhajan Lyrics By Your Astrology Guru- Create an expansive and respectful image that embodies the diverse essence of Ganesh, Vishnu, Guru Nanak, Durga Maa, Hanumanji, Sri Ram, Kali M

श्याम ने सुणा दे तेरे मन की बाता भजन लिरिक्स

श्याम ने सुणा दे तेरे मन की बाता,देर भले है अंधेर नहीं है,खबर से की लेवे सदा आता जाता,श्याम ने सुणा दे तेरे मन की बाता।। नानीबाई को भांत भरयो सांवरो,विष ने अमृत करयो यो मेरो सांवरो,ऐ की दया की कोई छोर नहीं है,यो ही तो है सबको भाग्यविधाता,श्याम ने सुणा दे तेरे मन की […]

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राम मानस के सिद्ध मंत्र

मानस के सिद्ध मंत्र : १॰ विपत्ति-नाश के लिये “राजिव नयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक।।” २॰ संकट-नाश के लिये “जौं प्रभु दीन दयालु कहावा। आरति हरन बेद जसु गावा।। जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी।। दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।।” ३॰ कठिन क्लेश नाश के

श्याम को अपना बनाकर देखलो भजन लिरिक्स

श्याम को अपना बनाकर देखलो भजन लिरिक्स

श्याम को अपना बनाकर देखलो,दिल की कोने में बिठाकर देखलो,दिल की कोने में बिठाकर देखलो,श्याम को अपना बनाकर देखलो।। तर्ज – दिल के अरमा आँसुओ में। इतना सीधा है मेरा ठाकुर यही,इतना सीधा है मेरा ठाकुर यही,प्रेम से दो बात बोलो तो सही,आएगा फ़ौरन बुलाकर देखलो,आएगा फ़ौरन बुलाकर देखलो,दिल की कोने में बिठाकर देखलो,दिल की […]

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भुवनेश्वरी ध्यानम् मंत्र

  भुवनेश्वरी ध्यानम् मंत्र उद्यद्दिनद्युतिमिन्दुकिरीटां तुङ्गकुचां नयनत्रययुक्ताम् । स्मेरमुखीं वरदाङ्कुशपाशां_ ऽभीतिकरां प्रभजे भुवनेशीम् ॥१॥ सिन्दूरारुणविग्रहां त्रिनयनां माणिक्यमौलिस्फुरत् । तारानायकशेखरां स्मितमुखीमापीनवक्षोरुहाम् ॥ पाणिभ्यामलिपूर्णरत्नचषकं संविभ्रतीं शाश्वतीं । सौम्यां रत्नघटस्थमध्यचरणां द्यायेत्परामम्बिकाम् ॥२॥

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मत्स्य पुराण – Matsya Puran

मत्स्य पुराण हिंदी में – Matsya Puran in Hindi मत्स्य पुराण (Matsya Purana) अष्टादश पुराणों (18 Puran) में से एक मुख्य पुराण है। इसमें 14 हजार श्लोक एवं 291 अध्याय है। भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार से सम्बद्ध होने के कारण यह पुराण मत्स्य पुराण कहलाता है। भगवान ने मत्स्यावतारी महात्म्य के द्वारा राजा वैवश्वत

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मन की बाता सांवरिये ने आज सुणाके देख ले भजन लिरिक्स

मन की बाता सांवरिये ने,आज सुणाके देख ले,सुणसी सुणसी सांवरिया मेरो,टेर लगाके देख ले,मन की बातां सांवरिये ने,आज सुणाके देख ले।। तर्ज – नगरी नगरी द्वारे द्वारे। दुनिया पे कै आस करे है,श्याम ही सांचो साथी,श्याम ही सांचो साथी,मन दीवले ने जगमग करले,घाल प्रेम की बाती,घाल प्रेम की बाती,रोम रोम में श्याम रमाले,फेर तमाशो देख […]

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शनि अष्टोत्तरशतनाम

शनि अष्टोत्तरशतनामावलिः शनि बीज मन्त्र ॐ प्राँ प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः ॥ ॐ शनैश्चराय नमः ॥ ॐ शान्ताय नमः ॥ ॐ सर्वाभीष्टप्रदायिने नमः ॥ ॐ शरण्याय नमः ॥ ॐ वरेण्याय नमः ॥ ॐ सर्वेशाय नमः ॥ ॐ सौम्याय नमः ॥ ॐ सुरवन्द्याय नमः ॥ ॐ सुरलोकविहारिणे नमः ॥ ॐ सुखासनोपविष्टाय नमः ॥ ॐ सुन्दराय

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हनुमान सहस्त्रनाम स्त्रोत- Hanuman Sahasranamam

हनुमान सहस्त्र नामावली – Hanuman Sahasranamam हनुमत्सहस्त्रनाम (Hanuman Sahasranama) का वर्णन ‘बृहज्ज्योतिषार्णव ’ में किया गया है । सर्वप्रथम श्री रामचंद्रजी ने हनुमान सहस्त्रनाम (Lord Hanuman 1008 Names) से हनुमानजी की स्तुति की थी । हनुमान जी को अपना इष्ट देव मानने वालो को हनुमत्-सहस्त्रनाम का पाठ प्रतिदिन करना चाहिये । इस सहस्त्रनाम स्तोत्र का

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अग्नि पुराण – Agni Puran

अग्नि पुराण – Agni Puran In Hindi अग्नि पुराण ज्ञान का विशाल भण्डार है। स्वयं अग्निदेव ने इसे महर्षि वसिष्ठ को सुनाते हुए कहा था – आग्नेये हि पुराणेऽस्मिन् सर्वा विद्या: प्रदर्शिता: अर्थात ‘अग्नि पुराण’ में सभी विद्याओं का वर्णन है। आकार में लघु होते हुए भी विद्याओं के प्रकाशन की दृष्टि से यह पुराणअपना विशिष्ट महत्त्व रखता है। इस

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108 उपनिषद के नाम और 11 मुख्य उपनिषद

108 उपनिषद के नाम – 11 मुख्य उपनिषद हिन्दू धर्म के अनुसार कुल मिलाकर 108 उपनिषद् वर्णित है, यह सारे उपनिषद वास्तविक रूप से हिन्दू धर्म की दार्शनिक अवधारणा एवं विचारो का अद्भुत संग्रह है, जो अत्यंत प्राचीन एवं महत्त्वपूर्ण श्रुति धर्मग्रन्थ है | इन उपनिषदों में बौद्ध धर्म, जैन धर्म एवं सिख धर्म के बारे

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नीव भराई से गृह निर्माण तक का सम्पूर्ण वास्तु ज्ञान और उपाय

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