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जाने माला के प्रकार, माला जपने का सही तरीका, नियम और फायदे-By Your Astrology Guru

वामन पुराण – Vamana Purana

वामन पुराण Pdf – Vamana Purana in Hindi वामन पुराण’ (Vaman Puran) नाम से तो वैष्णव पुराण लगता है, क्योंकि इसका नामकरण विष्णु के ‘वामन अवतार’ के आधार पर किया गया है, परन्तु वास्तव में यह शैव पुराण है। इसमें शैव मत का विस्तारपूर्वक वर्णन प्राप्त होता है। यह आकार में छोटा है। कुल दस हज़ार श्लोक इसमें

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तुम्मो मैडिटेशन – ठंड के दिनों में आपके शरीर को गर्म रखे

तुम्मो मैडिटेशन – Tummo Meditation ठंड के दिनों में पूरा शरीर जकड़ा जकड़ा लगता है, कुछ करने का मन नहीं करता, हम बिस्तर पर ही पढ़े रहते है | ऐसे में ठण्ड के दिनों में बाहर निकलना तो भूल ही जाते है | लेकिन ऐसे से तो हम अस्वस्थ हो जायेंगे क्योकि हद से ज्यादा सोना

Hindi Bhajan Lyrics By Your Astrology Guru- Create an expansive and respectful image that embodies the diverse essence of Ganesh, Vishnu, Guru Nanak, Durga Maa, Hanumanji, Sri Ram, Kali M

विश्वास है तो सहारा मिलेगा वही साथ है ये इशारा मिलेगा

विश्वास है तो, सहारा मिलेगा,वही साथ है, ये इशारा मिलेगा दिखती सरल पर ये राह कठिन है,नही सबको मिलती, गुरु की शरण है,जो वो हाथ थामे, जो वो हाथ थामे, किनारा मिलेगा,विश्वास है तो, सहारा मिलेगा,वही साथ है, ये इशारा मिलेगा जो जुड़ गया, मिल गई प्रीत उनकी,प्रीत की डोर बंधे, जो भी उनकी,नही उनसे […]

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गणेश सहस्त्र नाम

श्री गणेश सहस्त्र नामावली – Ganesh Sahasranamam भगवान श्री गणेश सभी देवताअों में प्रथम पूज्य माने गए हैं। उनके 1000 नामों का सस्वर पवित्र ध्वनि के साथ प्रति बुधवार उच्चारण किया जाए तो घर में मंगल कार्य होने लगते हैं। बच्चों को प्रगति मिलने लगती है और मुखिया को हर काम में सफलता प्राप्त होती है

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गणेश संकटनाशन स्तोत्र

  गणेश संकटनाशन स्तोत्र – Ganesh Sankatnashan Strotam प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् भक्तावासं स्मरेनित्यम आयुष्कामार्थ सिध्दये ॥१॥ प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् तृतीयं कृष्णपिङगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम ॥२॥ लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धुम्रवर्णं तथाषष्टम ॥३॥ नवमं भालचंद्रं च दशमं तु विनायकम् एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम ॥४॥ द्वादशेतानि नामानि त्रिसंध्यं य:

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मंगला गौरी स्तोत्रं

श्री मंगला गौरी स्तोत्र मंगला गौरी स्तोत्रं ॐ रक्ष-रक्ष जगन्माते देवि मङ्गल चण्डिके । हारिके विपदार्राशे हर्षमंगल कारिके ॥ हर्षमंगल दक्षे च हर्षमंगल दायिके । शुभेमंगल दक्षे च शुभेमंगल चंडिके ॥ मंगले मंगलार्हे च सर्वमंगल मंगले । सता मंगल दे देवि सर्वेषां मंगलालये ॥ पूज्ये मंगलवारे च मंगलाभिष्ट देवते । पूज्ये मंगल भूपस्य मनुवंशस्य संततम्

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देवी माहात्म्य – Devi Mahatmya

  देवी माहात्म्य – Devi Mahatmya ।। अष्टमोऽध्यायः ।। ॐ अरुणां करुणातरङ्गिताक्षीं धृतपाशाङ्कुशबाणचापहस्ताम्। अणिमादिभिरावृतां मयूखैरहमित्येव विभावये भवानीम्।। ‘ॐ’ ऋषिरुवाच ।। १।। चण्डे च निहते दैत्ये मुण्डे च विनिपातिते । बहुलेषु च सैन्येषु क्षयितेष्वसुरेश्वरः ।। २।। ततः कोपपराधीनचेताः शुम्भः प्रतापवान् । उद्योगं सर्वसैन्यानां दैत्यानामादिदेश ह ।। ३।। अद्य सर्वबलैर्दैत्याः षडशीतिरुदायुधाः । कम्बूनां चतुरशीतिर्निर्यान्तु स्वबलैर्वृताः ।। ४।।

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सन्तानगोपाल स्तोत्र

  ।। सन्तानगोपाल मूल मन्त्र ।। ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते । देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ।। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय । सन्तानगोपालस्तोत्रं श्रीशं कमलपत्राक्षं देवकीनन्दनं हरिम् । सुतसंप्राप्तये कृष्णं नमामि मधुसूदनम् ।।१।। नमाम्यहं वासुदेवं सुतसंप्राप्तये हरिम् । यशोदाङ्कगतं बालं गोपालं नन्दनन्दनम्।। २ ।। अस्माकं पुत्रलाभाय गोविन्दं मुनिवन्दितम्

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शनि वज्र पञ्जर कवच

  शनि वज्र पञ्जर कवच विनियोगः- ॐ अस्य श्रीशनैश्चर-कवच-स्तोत्र-मन्त्रस्य कश्यप ऋषिः, अनुष्टुप् छन्द, शनैश्चरो देवता, शीं शक्तिः, शूं कीलकम्, शनैश्चर-प्रीत्यर्थं जपे विनियोगः।। नीलाम्बरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान्। चतुर्भुजः सूर्यसुतः प्रसन्नः सदा मम स्याद्वरदः प्रशान्तः।।१ ब्रह्मोवाच श्रृणुषवमृषयः सर्वे शनिपीड़ाहरं महप्। कवचं शनिराजस्य सौरेरिदमनुत्तमम्।।२ कवचं देवतावासं वज्रपंजरसंज्ञकम्। शनैश्चरप्रीतिकरं सर्वसौभाग्यदायकम्।।३ ॐ श्रीशनैश्चरः पातु भालं मे सूर्यनंदनः। नेत्रे छायात्मजः

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बुध अष्टोत्तरशतनामवलिः – श्री बुध के 108 नाम और बीज मंत्र

  बुध बीज मन्त्र  ॐ ब्राँ ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः || बुध अष्टोत्तर शतनामवलिः – Budha Ashtottara Shatanamavali  ॐ बुधाय नमः || ॐ बुधार्चिताय नमः || ॐ सौम्याय नमः || ॐ सौम्यचित्ताय नमः || ॐ शुभ: प्रदाय नमः || ॐ दृढव्रताय नमः || ॐ दृढफलाय नमः || ॐ श्रुतिजालप्रबोधकाय नमः || ॐ सत्यवासाय नमः ||

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दशरथ कृत शनि स्तोत्र – Dashrath Krit Shani Stotra

दशरथ कृत शनि स्तोत्र – Dashrath Krit Shani Stotra शनि स्तोत्र (Shani Stotra in Hindi) जो भी जातक शनि ग्रह, शनि साढ़ेसात‍ी, शनि ढैया या शनि की महादशा से पीड़ित हैं उन्हें दशरथ कृत शनि स्तोत्र (Shani Stotram) का नियमित पाठ करना चाहिए। इस पाठ को नियमित करने से भगवान शनि प्रसन्न होते हैं तथा

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श्री ब्रह्मवैवर्ते महालक्ष्मी कवचं

  श्री महालक्ष्मी कवच – Shri Mahalakshmi Kavach Hindi Lyrics नारायण उवाच सर्व सम्पत्प्रदस्यास्य कवचस्य प्रजापतिः। ऋषिश्छन्दश्च बृहती देवी पद्मालया स्वयम्।।१ धर्मार्थकाममोक्षेषु विनियोगः प्रकीर्तितः। पुण्यबीजं च महतां कवचं परमाद्भुतम्।।२ ॐ ह्रीं कमलवासिन्यै स्वाहा मे पातु मस्तकम्। श्रीं मे पातु कपालं च लोचने श्रीं श्रियै नमः।।३ ॐ श्रीं श्रियै स्वाहेति च कर्णयुग्मं सदावतु। ॐ श्रीं ह्रीं

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श्री राम मंत्र और श्लोक – Shri Ram Mantra & Ram Shlok

श्री राम मंत्र और श्लोक – Shri Ram Mantra & Ram Shlok राम मंत्र (Ram Mantra) – हम आपको भगवान श्री राम के मंत्र (Shri Ram Mantra & Ram Shlok) की जानकारी दे रहें हैं | श्री राम मंत्र और राम श्लोक का जाप करने से साधक को अपने जीवन में सौभाग्य और सुख की

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कुम्भ मेला – भक्ति और सभ्यता का संगम तथा विश्व का सर्वोच्च तीर्थराज

कुम्भ मेला – Kumbha Mela कुम्भ पर्व (mahakumbh) विश्व मे किसी भी धार्मिक प्रयोजन हेतु भक्तो का सबसे बड़ा संग्रहण है । सैंकड़ो की संख्या में लोग इस पावन पर्व में उपस्थित होते हैं । कुम्भ (kumbh) का संस्कृत अर्थ है कलश, ज्योतिष शास्त्र में कुम्भ राशि का भी यही चिन्ह है । हिन्दू धर्म

हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हाथ देखने के सर्वोत्तम तरीके

हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हाथ देखने के सर्वोत्तम तरीके

हाथ किस तरह देखें ? | How To Read Hand According to Palmistry Hast Rekha Vigyan : हाथ देखने वाले (Palmistry Reader) को चाहिए कि हाथ देखने वाले व्यक्ति के सामने इस तरह बैठे कि जातक के हाथ पर अच्छी तरह रोशनी पड़ सकें । क्योंकि रोशनी जितनी अधिक और अच्छी होगी, हाथ की रेखाऐं