कलियुग में सिद्ध हो देव तुम्हीं (Kaliyug Me Siddha Ho Dev Tumhi)
कलियुग में सिद्ध हो देव तुम्हीं कलियुग में सिद्ध हो देव तुम्हीं, हनुमान तुम्हारा क्या
कलियुग में सिद्ध हो देव तुम्हीं कलियुग में सिद्ध हो देव तुम्हीं, हनुमान तुम्हारा क्या
बजरंग बाण दोहा:—- निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करै सनमान | तेहि के कारज सकल
माँ हो के शेर सवार आ गई भक्तों के द्वार माँ हो के शेर सवार,
नैना नीचा करले श्याम नैणा नीचा करले श्याम से, मिलावेली काई रे, नैणा नीचा करले
कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं, कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं, बाद अमृत पिलाने
दिन और दुखियो के तुम हो सहारे दिन और दुखियो के तुम हो सहारे सदा
मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो ओ मैया मोरी मैया ओ मैया मैया… मोरी मैया…
कितना प्यारा है श्रृंगार की तेरी लेउ नज़र उतार कितना प्यारा है श्रृंगार की तेरी
अरे रे मेरी जान है राधा तेरे पे कुर्बान मै राधा अरे रे मेरी जान
जब कोई नहीं आता मेरे बाबा आते है जब कोई नहीं आता मेरे बाबा
आरती कुंजबिहारी की आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ आरती कुंजबिहारी की,
आरती श्री राम चंद्र जी की श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्।
श्री कृष्ण भजन : हो मैना बोलूँगा, हो मुह न खोलूँगा, हो मैना बोलूँगा, हो
श्री कृष्ण चालीसा शी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम | अरुण अधर जनु
श्री विष्णु चालीसा विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाए | कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै