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महाशिवरात्रि 2024 पर जाने राशिनुसार पूजा विधि और आराध्य ज्योतिर्लिंग

महाशिवरात्रि 2024 पर जाने राशिनुसार पूजा विधि और आराध्य ज्योतिर्लिंग

Maha Shivaratri 2023 – महाशिवरात्रि 2023 फाल्गुन कृष्ण पक्ष में चतुर्दशी के दिन महा शिवरात्रि (Maha Shivratri) का पर्व मनाया जाता है, मान्यता है इस दिन शंकर जी और पार्वती जी का विवाह संपन्न हुआ था. महाशिवरात्रि को अर्द्ध रात्रि के समय ब्रह्माजी के अंश से शिवलिंग का प्राकट्य हुआ था। इसलिए रात्रि व्यापिनी चतुर्दशी

महाशिवरात्रि व्रत 2024- शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और मंत्र से मनाये शिवरात्रि

महाशिवरात्रि व्रत 2024- शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और मंत्र से मनाये शिवरात्रि

महाशिवरात्रि व्रत 2023 – शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और मंत्र से मनाये शिवरात्रि Mahashivratri 2023 – महाशिवरात्रि के प्रदोषकाल में शंकर-पार्वती का विवाह हुआ था। प्रदोष काल में महाशिवरात्रि तिथि में सर्व ज्योतिर्लिंगों का प्रादुर्भाव हुआ था। शास्त्रनुसार सर्वप्रथम ब्रह्मा व विष्णु ने महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पूजन किया था। पौराणिक मान्यतानुसार दिव्य ज्योर्तिलिंग का उदभव

महाशिवरात्रि व्रत कथा : भगवान शिव के पूजन और कथा श्रवण से मिटेगा नरक योग

महाशिवरात्रि व्रत कथा : भगवान शिव के पूजन और कथा श्रवण से मिटेगा नरक योग

महा शिवरात्रि व्रत कथा – Mahashivratri Vrat Katha Mahashivratri Vrat – फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को महा शिवरात्रि (Mahashivratri in Hindi) के नाम से जाना जाता है। इस दिन उपवास सहित विधि विधान से भगवान शिव की पूजा करने से नरक का योग मिटता है। ऐसी मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात ग्रहों की

शिव पूजन : महाशिवरात्रि पूजन रात्रि में ही क्यों करना चाहिए

शिव पूजन : महाशिवरात्रि पूजन रात्रि में ही क्यों करना चाहिए

Shiv Pujan – शिव पूजन की विशेषताएं क्या है ? शिव पूजा (Shiv Puja) के संबंध में अनेक पंथों में अलग-अलग प्रथाएं प्रचलित है। कुछ पंथों में शिवाजी को अर्पण कया हुआ नैवेद्य, पत्र, फूल, फल एवंज जल अग्राह्म माने गए है। लेकिन शिव को पूर्ण ब्रह्म मानने वाले भक्त इस विषय में कभी नहीं

क्या शिव ही स्रष्टि का आरंभ और अंत है ?

क्या शिव ही स्रष्टि का आरंभ और अंत है ? | Kya Shiv Hi Srishti Ka Aarambh Aur Ant Hai?

क्या शिव ही स्रष्टि का आरंभ और अंत है ? प्रलय शब्द का वर्णन लगभग हर धर्म के ग्रंथों में मिलता है। करीब 250 साल पहले महान भविष्यवक्ता नास्त्रेस्देमस ने भी प्रलय को लेकर घोषणा की है हालांकि इसमें उसके समय को लेकर कोई घोषणा नहीं है। महाभारत में कलियुग के अंत में प्रलय होने

विजया एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि

विजया एकादशी 2024 – पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

विजया एकादशी व्रत 2023 – Vijaya Ekadashi Vrat 2023 फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस बार विजया एकादशी का मान दो दिन है। 16 और 17 फरवरी दो दिन विजया एकादशी रहेगी। एकादशी तिथि प्रारंभ 16 फरवरी को सुबह 5 बजकर 32

विजया एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि

विजया एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि | Vijaya Ekadashi Vrat Katha and Puja Vidhi

विजया एकादशी व्रत विधि और कथा – Vijaya Ekadashi Vrat Katha भगवान विष्णु की साधना-आराधना के लिए समर्पित एकादशी का सनातन परंपरा में विशेष महत्व है। फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है। इस पावन तिथि पर  किया जाने वाला यह व्रत जीवन में सफलता पाने और मनोकामना को

सनातन धर्म के रहस्य – मृतक और मृत्यु से सम्बंधित

सनातन धर्म के रहस्य – मृतक और मृत्यु से सम्बंधित | Sanatan Dharma Ke Rahasya – Mritak Aur Mrityu Se Sambandhit

मृतक का सिर उत्तर दिशा की ओर क्यों रखते हैं? मृत्युकाल के समय प्राणी (मनुष्य) को उत्तर की ओर सिर करके इसलिए लिटाते हैं कि प्राणों का उत्सर्ग दशम द्वार से हो । चुम्बकीय विद्युत प्रवाह की दिशा दक्षिण से उत्तर की ओर होती है। कहते हैं कि मरने के बाद भी कुछ क्षणों तक

मौनी अमावस्या – मौनी अमावस्या का अर्थ, विधि-विधान और तिथि

मौनी अमावस्या – मौनी अमावस्या का अर्थ, विधि-विधान और तिथि

माघ मौनी अमावस्या | Mauni Amavasya 2023 मौनी अमावस्या तिथि – माघ माह में कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं। इस दिन मौन रहना चाहिए। मौनी अमावस्या का अर्थ – इस व्रत को मौन धारण करके समापन करने वाले को मुनि पद की प्राप्ति होती है। इसलिए इस दिन मौन व्रत रखकर

प्रकृति को समझने वाला व्यक्ति ही सर्वज्ञानी है

प्रकृति को समझने वाला व्यक्ति ही सर्वज्ञानी है | Prakriti Ko Samajhne Wala Vyakti Hi Sarvgyani Hai

सनातन ग्रंथों में अनंत ज्ञान छिपा है। सनातन ज्ञान के 1-1 ग्रंथों पर यदि अध्ययन किया जाये तो व्यक्ति का संपूर्ण जीवन ही छोटा पड़ सकता है । लेकिन दुर्भाग्य है कि हमने सनातन ज्ञान के मार्ग को छोड़कर पैशाची संस्कृति के मार्ग को अपना लिया है और आज उसी का परिणाम है कि हमें

क्या वास्तव में हनुमान जी ने सूर्य को निगल लिया था?

क्या वास्तव में हनुमान जी ने सूर्य को निगल लिया था? | Kya Vaastav Mein Hanuman Ji Ne Surya Ko Nigal Liya Tha?

हिन्दू जन मानस में ये कथा बड़ी प्रचलित है जब हनुमान जी सूर्यदेव को एक फल समझ कर निगल गए थे। कई लोग इस पर ये प्रश्न भी करते हैं कि ऐसा कैसे संभव है? कोई भला सूर्य को कैसे निगल सकता है? तो आइये आज इस लेख में इसी बारे में जानते हैं। सत्य

बृहद्बल – श्रीराम के वो वंशज जिन्होंने महाभारत युद्ध में भाग लिया

बृहद्बल – श्रीराम के वो वंशज जिन्होंने महाभारत युद्ध में भाग लिया | Brihadbal – Shriram Ke Wo Vanshaj Jinhonne Mahabharat Yudh Mein Bhag Liya

महाभारत के सन्दर्भ में एक प्रश्न बहुत प्रमुखता से पूछा जाता है कि क्या महाभारत के समय ऐसा कोई राजा था जो श्रीराम के वंश से सम्बंधित हो। तो इसका उत्तर है हाँ। महाभारत काल में श्रीराम के वंश के एक राजा थे जिन्होंने युद्ध में कौरवों की ओर से युद्ध किया था। उनका नाम

रामचरितमानस के अनुसार 14 प्रकार के व्यक्ति जो मरे हुए के समान हैं

रामचरितमानस के अनुसार 14 प्रकार के व्यक्ति जो मरे हुए के समान हैं | Ramcharitmanas Ke Anusaar 14 Prakar Ke Vyakti Jo Mare Hue Ke Saman Hain

गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस ज्ञान के सागर के समान है। इसमें ज्ञान की ऐसी गूढ़ बातें लिखी है जो हर किसी को पता होनी चाहिए। मानस में ही तुलसीदास जी ने उन 14 प्रकार के व्यक्तियों के बारे में बताया है जो जीवित होते हुए भी मरे हुए के समान हैं। रामचरितमानस के लंका कांड

प्राचीन हिन्दू विवाह के प्रकार, जाने कौनसा है श्रेष्ठ ? | Pracheen Hindu Vivah Ke Prakar, Jaane Kaunsa Hai Shreshth?

विवाह के प्रकार – Vivah Ke Prakar हिंदू धर्म में विवाह को सात जन्मों का बंधन माना गया है जिसमें दो आत्माओं का मिलन होता है। विवाह को सोलह संस्कारों में से पंद्रहवां संस्कार बताया गया हैं जिसमें एक व्यक्ति अपने ब्रह्मचर्य जीवन से गृहस्थ जीवन प्रवेश करता है। इसके साथ ही मनुस्मृति में विवाह

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परशुराम जयंती पर जानिए परशुराम का इतिहास

भगवान परशुराम जयंती – Bhagwan Parshuram भगवान परशुराम (Lord Parshuram) भगवान विष्णु के दस अवतार में से एक है। उनका जन्म ब्राह्मण कुल में हुआ था जो वामन अवतार के बाद तथा श्री राम अवतार से पूर्व जन्मे थे। मान्यता हैं कि वे आज भी जीवित हैं तथा कलियुग के अंत तक वे जीवित रहेंगे।