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जाने माला के प्रकार, माला जपने का सही तरीका, नियम और फायदे-By Your Astrology Guru

गणगौर की कहानी और इतिहास, गणगौर पूजा – Gangaur Ki Kahani

गणगौर कथा – Gangaur Ki Kahani आज आपको गणगौर की कहानी और गणगौर का इतिहास बताएँगे साथ ही गणगौर और ईसर कौन थे और हम क्यों गणगौर पूजा करते है और गणगौर राजस्थान में कब मनाया जाता है आदि की जानकारी देंगे तो चलिए शुरू करते है। गणगौर की कथा – एक बार भगवान शंकर

गोवर्धन पूजा 2023 – गोवर्धन पूजा का मुहूर्त, पूजन विधि और कथा

गोवर्धन पूजा 2023 – गोवर्धन पूजा का मुहूर्त, पूजन विधि और कथा 

गोवर्धन पूजा | Govardhan Pooja  गोवर्धन पूजा का शुभ टाइम : गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन की जाती है। गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja Time) या अन्नकूट पूजा असल में गोवर्धन पर्वत की पूजा है। यह पर्वत बृज में स्थित है, इसे गिरिराज पर्वत के नाम से भी जाना जाता है।

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दीपावली पर करे लक्ष्मी प्राप्ति के सरल अचूक घरेलू उपाय

लक्ष्मी प्राप्ति के अचूक उपाय लक्ष्मी की चाह वाले व्यक्ति को धन वृद्धि के लिए दीपावली के पावन अवसर पर लक्ष्मी प्राप्ति के घरेलू उपाय तो अवश्य ही करने चाहिए क्योकि धन के बिना कोई भी पारिवारिक, सामाजिक अथवा आध्यात्मिक कार्य करना संभव नहीं है। धन (लक्ष्मी) का आगमन होता है मेहनत, लगन एवं भाग्य से,

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धनतेरस पूजा विधि – भगवान धनवंतर‍ि और मां लक्ष्‍मी की मंत्रो से पूजा

धनतेरस पूजा विधि | Dhanteras Puja Vidhi धनतेरस पूजा विधि के अनुसार धनतेरस के दिन प्रात: उठकर नित्यकर्म से निवृ‍त्त होकर पूजा की तैयारी करें। घर के ईशान कोण में ही पूजा करें। पूजा के समय हमारा मुंह ईशान, पूर्व या उत्तर में होना चाहिए। पूजन के समय पंचदेव की स्थापना जरूर करें। सूर्यदेव, श्रीगणेश,

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धन प्राप्ति के लिए धनतेरस पर क्या खरीदना चाहिए

धनतेरस में क्या खरीदना चाहिए | Dhanteras Par Kya Kharide धनतेरस में क्या खरीदना चाहिए – धनतेरस के दिन नये उपहार, सिक्का, बर्तन व गहनों की खरीदारी करना शुभ रहता है। शुभ मुहूर्त समय में पूजन करने के साथ सात धान्यों की पूजा की जाती है । सात धान्य गेंहूं, उडद, मूंग, चना, जौ, चावल

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शारदीय नवरात्रि 2023 : कलश स्थापना, शुभ मुहूर्त और व्रत पूजन विधि

शारदीय नवरात्रि 2023 – कलश स्थापना मुहूर्त शरद ऋतु के आश्विन माह में आने के कारण इन्हें शारदीय नवरात्री का नाम दिया गया है। इस बार शारदीय नवरात्रि 2023 में 15 अक्टूबर से शुरू होगी जो 24 Oct, 2023 को समाप्त होगी। शारदीय नवरात्रि अश्विन माह की शुक्ल प्रतिपदा से लेकर विजयदशमी के दिन तक

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इंदिरा एकादशी व्रत कथा और तिथि व पूजा मूहुर्त

इंदिरा एकादशी – indira ekadashi आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है। एकादशी तिथि का हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों के लिये खास महत्व है। प्रत्येक चंद्र मास में दो एकादशियां आती है। इस तरह साल भर में 24 एकादशियां आती है मलमास या कहें अधिक मास की

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राशि के अनुसार रुद्राक्ष धारण से पाए कष्टों से मुक्ति

राशि के अनुसार रुद्राक्ष – Rudraksha As Per Rashi वैदिक ज्योतिष में रुद्राक्ष का बहुत महत्व है। राशि के अनुसार रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति के जीवन की सभी परेशानियां दूर होती हैं और जातक को जीवन में दुख और संकटों का सामना नहीं करना पड़ता है। राशि अनुसार रुद्राक्ष पहनने से व्यक्ति का भाग्य

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जन्माष्टमी पर श्री कृष्ण को भोग में चढ़ाएं ये 3 प्रसाद, जानें रेसिपी

आज दुनिया भर में जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा, श्री कृष्ण के जन्म को लेकर पर्व होगा और लोग व्रत रखेंगे। तरह-तरह के पकवान बनेंगे और भगवान को भोग लगाने के लिए मिठाइयां और प्रसाद बनाए जाएंगे। ऐसे में आपने भी पकवान और मिष्ठान की लंबी लिस्ट तैयार की होगी। अगर आपको अब तक समझ

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कुंती का त्याग

कुंती का त्याग | Kunti Ka Tyag पाण्डव अपनी मां कुंती के साथ इधर से उधर भ्रमण कर रहे थे| वे ब्राह्मणों कावेश धारण किए हुए थे| भिक्षा मांगकर खाते थे और रात में वृक्ष के नीचे सो जायाकरते थे| भाग्य और समय की यह कैसी अद्भुत लीला है| जो पांडव हस्तिनापुरराज्य के भागीदार हैं और जो सारे जगत को अपनी मुट्ठी में करने में समर्थ हैं, उन्हीं को आज भिक्षा पर जीवन-यापन करना पड़ रहा है| दोपहर के बाद का समय था| पांडव अपनी मां कुंती के साथ वन के मार्ग से आगे बढ़ते जा रहे थे| सहसा उन्हें वेदव्यास जी दिखाई पड़े| कुंती दौड़कर वेदव्यास जी के चरणों में गिर पड़ी| उनके चरणों को पकड़कर बिलख-बिलख कर रोने लगी| उसने अपने आंसुओं

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महाकालेश्वर की कथा

महाकालेश्वर की कथा | Mahakaleshwar Khata उज्जयिनी में राजा चंद्रसेन का राज था। वह भगवान शिव का परम भक्त था।शिवगणों में मुख्य मणिभद्र नामक गण उसका मित्र था। एक बार मणिभद्र नेराजा चंद्रसेन को एक अत्यंत तेजोमय ‘चिंतामणि’ प्रदान की। चंद्रसेन ने इसे गले में धारण किया तो उसका प्रभामंडल तो जगमगा ही उठा, साथ ही दूरस्थ देशों में उसकी यश-कीर्ति बढ़ने लगी। उस ‘मणि’ को प्राप्त करने के लिए दूसरे राजाओं ने प्रयास आरंभ कर दिए। कुछ ने प्रत्यक्षतः माँग की, कुछ ने विनती की। चूँकि वह

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भीष्म की प्रतिज्ञा

भीष्म की प्रतिज्ञा | Bhishma Pratigya एक बार हस्तिनापुर के महाराज प्रतीप गंगा के किनारे तपस्या कररहे थे। उनके रूप सौन्दर्य से मोहित हो कर देवी गंगा उनकी दाहिनीजाँघ पर आकर बैठ गईं। महाराज यह देख कर आश्चर्य में पड़ गयेतब गंगा ने कहा, “हे राजन्! मैं जह्नु ऋषि की पुत्री गंगा हूँ औरआपसे विवाह

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शस्त्र और शास्त्र के महारथी – परशुराम

शस्त्र और शास्त्र के महारथी – परशुराम | Parshuram Ki Katha मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जिनका सादर नमन करते हों, उन शस्त्रधारी और शास्त्रज्ञ भगवान परशुराम की महिमा का वर्णन शब्दों की सीमा में संभव नहीं। वे योग, वेद और नीति में निष्णात थे, तंत्रकर्म तथा ब्रह्मास्त्र समेत विभिन्न दिव्यास्त्रों के संचालन में भी पारंगत थे,

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ध्रुवतारे की कथा

ध्रुवतारे की कथा | Dhruvtara Khatha राजा उत्तानपाद ब्रह्माजी के मानस पुत्र स्वयंभू मनु के पुत्र थे। उनकी सनीति एवं सुरुचि नामक दो पत्नियाँ थीं। उन्हें सुनीति से ध्रुव एवं सुरुचि से उत्तम नामक पुत्र प्राप्त हुए। वे दोनों राजकुमारों से समान प्रेम करते थे। यद्यपि सुनीति ध्रुव के साथ-साथ उत्तम को भी अपना पुत्र

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धर्मराज को श्राप

धर्मराज को श्राप | Dharmraj Shrap एक धर्मात्मा ब्राह्मण थे, उनका नाम मांडव्य था| वे बड़े सदाचारी और तपोनिष्ठ थे| संसार के सुखों और भोगों से दूर वन में आश्रम बनाकर रहते थे| अपने आश्रम के द्वार पर बैठकर दोनों भुजाओं को ऊपर उठाकर तप करते थे| वन के कंद-मूल-फल खाते और तपमय जीवन व्यतीत