शास्त्रानुसार मनुष्य कल्याण हेतु समयानुसार किये जाने वाले कर्म और कर्तव्य
मनुष्य कल्याण हेतु किये जाने वाले कर्म और कर्तव्य १. दो घटी अर्थात् अड्तालीस मिनट का एक मुहूर्त होता है । पन्द्रह मुहूर्त का एक दिन और पन्द्रह मुहूर्त की एक रात होती है । सूर्योदय से तीन मुहूर्त का ‘ प्रात: काल ‘, फिर तीन मुहूर्त का ‘ संगवकाल ‘, फिर तीन मुहूर्त का
