गौर गौर गोमती ईसर पूजे पार्वती का श्लोक है, जो हिंदू धर्म में उनकी पूजा के दौरान उच्चारित किया जाता है।
इस श्लोक में “गौर गौर” शब्द दो बार बोले गए हैं, जो पार्वती को संबोधित करते हैं। “गोमती” शब्द प्राचीन भारत के एक पवित्र नदी को दर्शाता है, जिसे गोमती नदी के नाम से भी जाना जाता है। “ईसर” शब्द का अर्थ होता है ईश्वर या भगवान का चिह्न। “पार्वती” नाम हिंदू धर्म की महादेव भक्त देवी पार्वती को दर्शाता है।
इस श्लोक के अर्थ के अनुसार, पार्वती जो गौर (सुंदर) हैं, वे गोमती नदी को ईसर (भगवान का चिह्न) समझती हैं और उसकी पूजा करती हैं।
गौर गौर गोमती ईसर पूजे पार्वती
Gor Gor Gomti Geet
गौर गौर गोमती ईसर पूजे पार्वती
पार्वती का आला-गीला , गौर का सोना का टीका
टीका दे , टमका दे , बाला रानी बरत करयो
करता करता आस आयो वास आयो
खेरे खांडे लाडू आयो , लाडू ले बीरा ने दियो
बीरो ले मने पाल दी , पाल को मै बरत करयो
सन मन सोला , सात कचौला , ईशर गौरा दोन्यू जोड़ा
गौर गौर गोमती (Gor Gor Gomti Geet )
जोड़ ज्वारा ,गेंहू ग्यारा , राण्या पूजे राज ने , म्हे पूजा सुहाग ने
राण्या को राज बढ़तो जाए , म्हाको सुहाग बढ़तो जाय ,
कीड़ी- कीड़ी , कीड़ी ले , कीड़ी थारी जात है , जात है गुजरात है ,
गुजरात्यां को पाणी , दे दे थाम्बा ताणी
ताणी में सिंघोड़ा , बाड़ी में भिजोड़ा
गौर गौर गोमती (Gor Gor Gomti Geet )
म्हारो भाई एम्ल्यो खेमल्यो , सेमल्यो सिंघाड़ा ल्यो
लाडू ल्यो , पेड़ा ल्यो सेव ल्यो सिघाड़ा ल्यो
झर झरती जलेबी ल्यो , हरी -हरी दूब ल्यो गणगौर पूज ल्यो
इस तरह सोलह बार बोल कर आखिरी में
बोले एक-लो , दो-लो ,तीन लो ……..सोलह-लो।
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Song Credits:
Lyricist: Traditional









