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राहु शान्ति का उपाय कर पाए जीवन में तरक्की और खुशहाली

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राहु शान्ति का उपाय कर पाए जीवन में तरक्की और खुशहाली

१. राहु को प्रसन्न करने हेतु गोमेद युक्त राहु यंत्र लॉकेट गले में धारण करें।

२. शिवजी पर बिल्वपत्र चढ़ाएं व शिव मंदिर के नियमित दर्शन करें। शिव जी पर धतूरे के पुष्प चढ़ावें।

३. घर में या आँगन में गोबर, लकड़ी आदि का धुंआ न जलाएं तथा रसोई में चिमनी (धुआँदानी) न रखें।

४. राहु उच्च का हो तो राहु की न दें और राहु नीच का हो तो राहु की चीजन का दान न लें।

५. हरिवंश पुराण के अनुसार जातक को पराई कन्या का दान संकल्पपूर्वक करने से पुत्र लाभ होता है।

६. झूठी गवाही न दे तथा झूठ न बोलें। गबन न करें व ससुराल से अच्छे सम्बन्ध रखें।

७. पंचधातु में गोमेद धारण करें। गोमेद के अभाव में सिक्का धारण करें।

८. नवनाथ के तरह विधिपूर्वक परायण करें।

९. श्रवण में प्रति सोमवार लघुरुद्र पाठ करे।

१०. राहु पीड़ा नाग श्राप से सम्बंधित रहती है अतः शुद्ध चांदी में नागदेव की मूर्ति बनवाकर उसकी विधिवत पूजा करके दान करना चाहिए।

११. नागपंचमी को शुद्ध चांदी की नागदेव की मूर्ति बनवाकर उसे पूजा स्थान पर स्थापित कर उसकी नियमित हल्दी, कुमकुम, नैवेद्य आदि से पूजन करें। कार्य हो जाने पर उन्हें ठंडा कर दें।

१२. सुयोग स्थान से प्राप्त मंत्रसिद्ध चैतन्यवाँ छिन्नमस्ता माँ के यंत्र की उपासना अत्यंत चमत्कारी फलदायी होती है।

१३. राहु शांति के लिए बटुक भैरव प्रयोग भी लाभकारी है।

१४. राहु मन्त्र का जप-हवन और भार्गव ऋषि प्रणीत लक्ष्मी-हृदय का पाठ करें साथ ही शनि का व्रत करे क्यूंकि शनिवत राहु प्रसिद्द है।

१५. राहुकृत प्रेत बाधा या अभिचार सुरक्षा के लिए मंत्रसिद्ध चैतन्य नृसिंह कवच अपने गले में अवश्य ही धारण करें।

१६. राहु पीड़ा की विशेष शांत हेतु बला, कूठ, लाजा, मूसली, नागरमोथा , देवदार सरसों, हल्दी, लोध एवं सरपंख मिलाकर ८ मंगलवार तक स्नान करें।

१७. यदि राहु के कारण संतान बाधा हो रही है तो सर्प के शाप के कारण ही ऐसा हुआ है। ऐसे में जातक को राहु के वेदोक्त मंतों के १८०००० बार जप करते हुए घर में नागपाश यंत्र का नित्य पूजन करना चाहिए। जरूरतमंद लोगों को काले भूरे कम्बर का दान करना चाहिए एवं बुधवार रखना चाहिए।

१८. राहु के समस्त अरिष्टों के शमनार्थ असुरमर्दनि भगवती दुर्गा की सविधि उपासना और दुर्गासप्तशती का पाठ करें। विशेष कष्टकारक स्थिति में शतचंडी अनुष्ठान और हवन करना चाहिए।

१९. उत्तम गोमेद जड़ित राहु यंत्र गले में धारण करना लाभप्रद है।

२०. द्वादशभावस्थ शनि + राहु के कुप्रयोग से खोई हुई वस्तुएं या हानि के लिए कार्तवीर्यार्जुन मन्त्र का प्रयोग अभीष्टप्रद रहता है।

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