जाने लाल किताब अनुसार पूर्वजन्म के ऋण और उनके उपाय
जाने लाल किताब अनुसार पूर्वजन्म के ऋण और उनके उपाय अपने पूर्वजों के लिए पापों का फल जब उनकी वंशावली में से किसी एक जातक को भोगना पडे़, तो वह पितृ ऋण कहलाता है। पितृ ऋण अर्थात् पितरों (पूर्वजों) का ऋण । पिता ऋण लेता है, पुत्र चुकाता है। यही परम्परा है। लाल किताब ने इसे
जानिये ज्योतिष शास्त्र : पार्ट-3
जानिये ज्योतिष शास्त्र : पार्ट-3 अब हम थोडा और आगे बढ़ेंगे | जैसे जैसे हम आगे बढ़ते हैं, वैसे वैसे हमारा वास्ता पंचांग और कैलेंडर से पड़ता जायेगा | अतः हमें पंचांग के भी कुछ अंगों से प्रत्यक्ष होना पड़ेगा | पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग तथा करण, ये पांच अंग होते हैं इसीलिए
जानिये ज्योतिष शास्त्र : पार्ट -2
जानिये ज्योतिष शास्त्र : पार्ट -2 योजनानि शतान्यष्टो भूकर्णों द्विगुणानि तु |तद्वर्गतो दशगुणात्पदे भूपरिधिर्भवते || अर्थात पृथ्वी का व्यास ८०० के दूने १६०० योजन है, इसके वर्ग का १० गुना करके गुणनफल का वर्गमूल निकालने से जो आता है, वह पृथ्वी कि परिधि है | इस श्लोक को विस्तार से आगे चर्चा करेंगे किन्तु इस
