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नागेश्वर ज्योतिर्लिंग – Nageshwar Jyotirling

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नागेश्वर मंदिर – Nageshwar Temple – Jyotirling In Gujarat

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर भगवान शिव के पवित्र 12 ज्योतिर्लिंगों में से दसवे स्थान पर है. नागेश्वर के वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण, सूपर केसेट्स इंडस्ट्री के मालिक स्वर्गीय श्री गुलशन कुमार ने करवाया था. उन्होंने इस जीर्णोद्धार का कार्य 1996 में शुरू करवाया, तथा इस बीच उनकी हत्या हो जाने के कारण उनके परिवार ने इस मंदिर का कार्य पूर्ण करवाया. मंदिर निर्माण में लगभग 1.25 करोड़  की लागत आई जिसे गुलशन कुमार चेरिटेबल ट्रस्ट ने अदा किया.

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के परिसर में भगवान शिव की ध्यान मुद्रा में एक बड़ी ही मनमोहक अति विशाल प्रतिमा है जिसकी वजह से यह मंदिर को दो किलोमीटर की दुरी से ही दिखाई देने लगता है, यह मूर्ति 125 फीट ऊँची तथा 25 फीट चौड़ी है. मुख्य द्वार साधारण लेकिन सुन्दर है. मंदिर में पहले एक सभाग्रह है, जहाँ पूजन सामग्री की छोटी छोटी दुकानें लगी हुई हैं. सभामंड़प के आगे तलघर नुमा गर्भगृह में श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थापित है.

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग – Nageshwar Jyotirling

श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात प्रान्त के द्वारकापुरी से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है| यह स्थान गोमती द्वारका से बेट द्वारका जाते समय रास्ते में पड़ता है| इसके अतिरिक्त नागेश्वर नाम से दो अन्य शिवलिंगों की भी चर्चा ग्रन्थों में है| मतान्तर से इन लिंगों को भी कुछ लोग ‘नागेश्वर ज्योतिर्लिंग कहते हैं| इनमें से एक नागेश्वर ज्योतिर्लिंग निजाम हैदराबाद, आन्ध्र प्रदेश में हैं, जबकि दूसरा उत्तराखंड के अल्मोड़ा में ‘योगेश या ‘जागेश्वर शिवलिंग’ के नाम से प्रसिद्ध है| यद्यपि शिव पुराण के अनुसार समुद्र के किनारे द्वारका पुरी के पास स्थित शिवलिंग ही ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रमाणित होता है।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग  की कथा – Nageshwar Jyotirlinga Story In Hindi

शिव पुराण के अनुसार एक धर्मात्मा, सदाचारी वैश्य शिवजी का अनन्य भक्त था, जिसका नाम ‘सुप्रिय’ था| जब वह नौका पर सवार होकर समुद्र के जलमार्ग से कहीं जा रहा था, उस समय ‘दारूक’ नामक एक भयंकर बलशाली राक्षस ने उस पर आक्रमण कर दिया| राक्षस दारूक ने सभी लोगों सहित सुप्रिय का अपहरण कर लिया और अपनी पुरी में ले जाकर बन्दी बना लिया|

चूंकि सुप्रिय शिव जी का अनन्य भक्त था, इसलिए वह हमेशा शिव जी की आराधना में तन्मय रहता था| कारागार में भी उसकी आराधना बन्द नहीं हुई और उसने अपने अन्य साथियों को भी शंकर जी की आराधना के प्रति जागरूक कर दिया| वे सभी शिवभक्त बन गये| जब इसकी सूचना राक्षस दारूक को मिली, तो वह क्रोध में उबल उठा| उसने देखा कि कारागार में सुप्रिय ध्यान लगाए बैठा है, तो उसे डांटते हुए बोला– ‘अरे वैश्य! तू आंखें बन्द करके मेरे विरुद्ध कौन-सा षड्यन्त्र रच रहा है

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वह ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाता हुआ धमका रहा था, लेकिन सुप्रिय पर कुछ भी प्रभाव न पड़ा| घमंडी राक्षस दारूक ने अपने अनुचरों को आदेश दिया कि सुप्रिय को मार डालो| अपनी हत्या के भय से भी सुप्रिय डरा नहीं और वह भयहारी, संकटमोचक भगवान शिव को ही पुकारने में ही लगा रहा| उस समय अपने भक्त की पुकार पर भगवान शिव ने उसे कारागार में ही दर्शन दिये| कारागार में एक ऊंचे स्थान पर चमकीले सिंहासन पर स्थित भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में उसे दिखाई दिये| शंकरजी ने अपने पाशुपतास्त्र से सभी राक्षसों का नाश किया और भक्तों के कल्याण के लिए वहीँ लिंग रूप में अवस्थित हो गए|

नागेश्वर महादेव – Nageshwar Mahadev

नागेश्वर का मतलब नागों के ईश्वर से है , इसीलिए विष आदि के बचाव के लिए लोग यहाँ आते हैं। शास्त्रों में इस ज्योतिर्लिंग की महिमा की चर्चा की गयी है। काफी दूर-दूर से लोग यहाँ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए आते हैं।भोलेनाथ के निर्देशानुसार ही उस शिवलिंग का नाम ‘नागेश्वर ज्योतिर्लिंग’ पड़ा |‘नागेश्वर ज्योतिर्लिंग’ के दर्शन करने के बाद जो मनुष्य उसकी उत्पत्ति और माहात्म्य सम्बन्धी कथा सुनता है, वह भी समस्त पापों से मुक्त हो जाता है तथा सम्पूर्ण भौतिक और आध्यात्मिक सुखों को प्राप्त करता है|

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का समय – Nageshwar Jyotirlinga Temple Timings

मंदिर सुबह पांच बजे प्रातः आरती के साथ खुलता है, आम जनता के लिए मंदिर छः बजे सुबह खुलता है. भक्तों के लिए शाम चार बजे श्रृंगार दर्शन  होता है तथा उसके बाद गर्भगृह में प्रवेश बंद हो जाता है. शयन आरती शाम सात बजे होती है तथा रात नौ बजे मंदिर बंद हो जाता है.

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग पूजा – Nageshwar Jyotirlinga Pooja

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में मंदिर प्रबंधन समिति के द्वारा भक्तों की सुविधा के लिए रु. 105 से लेकर रु. 2101 के बीच विभिन्न प्रकार की पूजाएँ सशुल्क सम्पन्न कराई जाती हैं. जिन भक्तों को पूजन अभिषेक करवाना होता है, उन्हें मंदिर के पूजा काउंटर पर शुल्क जमा करवाकर रसीद प्राप्त करनी होती है, तत्पश्चात मंदिर समिति भक्त के साथ एक पुरोहित को अभिषेक के लिए भेजती है जो भक्त को लेकर गर्भगृह में लेकर जाता है तथा शुल्क के अनुसार पूजा करवाता है.

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे पहुँचें – How To Reach Nageshwar Jyotirlinga

नागेश्वर तक आसानी से पहुँचने के लिए आपको पहले द्वारका पहुँचने की आवश्यकता है। द्वारका स्टेशन अहमदाबाद और ओखा के बीच चलने वाले ब्रॉड गेज रेलवे ट्रैक पर स्थित है। द्वारका स्टेशन पर ट्रेन लेने के अलावा आप द्वारका से केवल 7 किमी दूर स्थित वेरावल स्टेशन तक ट्रेन से भी जा सकते हैं। वेरावल स्टेशन पहुँचने पर आप द्वारका पहुँचने के लिए बस या टैक्सी ले सकते हैं। यदि आप फ्लाइट से यात्रा करना चाहते हैं, तो आपको पहले जामनगर जाने की आवश्यकता है

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क्योंकि जामनगर हवाई अड्डा द्वारका शहर का निकटतम हवाई अड्डा है और फिर सड़क मार्ग से यात्रा पूरी करें। गुजरात के किसी भी हिस्से से द्वारका की यात्रा आसान है क्योंकि यह शहर सड़क परिवहन द्वारा गुजरात के अन्य सभी महत्वपूर्ण शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। एक बार जब आप द्वारका पहुंच गए हैं तो आप नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के बहुत करीब हैं जो कि द्वारका शहर से केवल 25 मिनट की दूरी पर है और ऑटो रिक्शा या कैब के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है।

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